भारत अब दुनिया के सामने आंख से आंख मिलाकर बात करने के लिए तैयार, PM मोदी के 25 साल के सफर पर बोले योगी

वाराणसी : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन के मौके पर वाराणसी में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनके 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन और इस दौरान बदलते भारत की तस्वीर का जिक्र किया। योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के तप, परिश्रम और साधना से देश को नए भारत का दर्शन हो रहा है। यह ऐसा भारत है जो सुरक्षित है और दुनिया के सामने आंख से आंख मिलाकर बात करने के लिए तैयार है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर जनसेवा के 25 वर्ष 7 अक्टूबर 2026 को पूरे होने जा रहे हैं। 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी। योगी ने प्रधानमंत्री की इस यात्रा को ‘सेवा संकल्प’ से जोड़ते हुए कहा कि उन्होंने ‘चरैवेति-चरैवेति’ के मंत्र के साथ लगातार अपनी यात्रा को आगे बढ़ाया है।

25 साल की यात्रा और बदलते भारत का जिक्र

योगी आदित्यनाथ ने प्रधानमंत्री के 25 वर्षों के सार्वजनिक जीवन को सुशासन, सेवा और अंत्योदय से जोड़ते हुए कहा कि इस यात्रा का प्रभाव देश के गांवों तक दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि आज गांव आत्मनिर्भरता की कहानियां सुना रहे हैं और देश में विकास के साथ अपनी विरासत को लेकर गौरव की भावना भी मजबूत हुई है।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में गरीब कल्याण और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार आवास, शौचालय, उज्ज्वला और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के जरिए बड़ी संख्या में लोगों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचा है। डिजिटल इंडिया, स्टार्टअप, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नई तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती गतिविधियों को भी उन्होंने नए भारत की तस्वीर से जोड़ा।

अर्थव्यवस्था पर योगी का बड़ा बयान

भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर भी मुख्यमंत्री योगी ने बड़ा लक्ष्य सामने रखा। वाराणसी में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में देश तेजी से दुनिया की नंबर-1 अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि देशवासी प्रधानमंत्री के नेतृत्व में आत्मनिर्भर, सुरक्षित और विकसित भारत की संकल्पना को साकार होते देख सकें, इसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। योगी का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत की आर्थिक स्थिति और वैश्विक रैंकिंग को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। कार्यक्रम में अर्थव्यवस्था के साथ आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के लक्ष्य को भी प्रधानमंत्री के नेतृत्व से जोड़कर पेश किया गया।

काशी और वडनगर को जोड़ेंगी दो यात्राएं

प्रधानमंत्री मोदी की जन्मभूमि वडनगर और उनकी वर्तमान राजनीतिक कर्मभूमि वाराणसी को जोड़ने के लिए ‘सेवा संकल्प यात्रा’ का आयोजन किया गया है। योगी ने इन यात्राओं को प्रधानमंत्री के 25 वर्ष के सार्वजनिक जीवन से जोड़ते हुए कहा कि काशी और वडनगर के बीच निकलने वाली यात्राएं ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को आगे बढ़ाएंगी।

पहली यात्रा काशी से वडनगर के लिए रवाना हुई। इस यात्रा में बड़ी संख्या में बाइकर्स शामिल हैं। यात्रा के जरिए काशी और वडनगर के बीच सांस्कृतिक एवं भावनात्मक जुड़ाव को सामने रखा जा रहा है। दूसरी ओर वडनगर से वाराणसी की दिशा में भी यात्रा का कार्यक्रम रखा गया है। दोनों यात्राओं को प्रधानमंत्री के जीवन के दो महत्वपूर्ण पड़ावों से जोड़ा गया है। इन यात्राओं में उत्तर प्रदेश की नदियों के जल को वडनगर ले जाने और गुजरात से जल लेकर काशी पहुंचने की योजना भी शामिल है। इसका उद्देश्य दोनों क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक संबंध और ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को मजबूत करना बताया गया है।

बाबा विश्वनाथ के दरबार में पीएम के लिए प्रार्थना

प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के काशी विश्वनाथ मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की। जलाभिषेक और आरती के बाद प्रधानमंत्री के स्वस्थ एवं दीर्घायु जीवन की कामना की गई। इस मौके पर 76 किलो के लड्डू भी तैयार किए गए थे।

योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री लंबे समय तक देश का नेतृत्व करें, ताकि भारत आत्मनिर्भर, सुरक्षित और विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को हासिल कर सके। उन्होंने भारत के दुनिया की नंबर-1 अर्थव्यवस्था की दिशा में तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद भी जताई।

सेवा से विकसित भारत तक का संदेश

वाराणसी के कार्यक्रम में योगी के संबोधन का केंद्र प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्षों का सार्वजनिक जीवन, सेवा संकल्प और बदलते भारत की तस्वीर रही। मुख्यमंत्री ने इसे सुरक्षित, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के लक्ष्य से जोड़ते हुए कहा कि देश अब वैश्विक स्तर पर अपनी बात मजबूती से रखने के लिए तैयार है। काशी और वडनगर को जोड़ने वाली यात्राओं के जरिए भी इसी संदेश को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। एक ओर वडनगर प्रधानमंत्री के शुरुआती जीवन और राजनीतिक यात्रा का प्रतीक है, तो दूसरी ओर वाराणसी उनके वर्तमान सार्वजनिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है।

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