असम में हाथी के गले में फंसा ट्रैक्टर का टायर, वन विभाग ने रेस्क्यू कर बचाई जान

गोलाघाट : असम के गोलाघाट जिले में एक जंगली हाथी के गले में ट्रैक्टर का टायर फंसने का हैरान करने वाला मामला सामने आया। हाथी को इस हालत में चाय बागान के आसपास घूमते देखा गया, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने वन विभाग को सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और हाथी को सुरक्षित बचाने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।

चाय बागान के पास दिखाई दिया हाथी

हाथी नुमालीगढ़ क्षेत्र के आसपास चाय बागान में नजर आया था। उसकी गर्दन में बड़ा टायर फंसा हुआ था। टायर के कारण हाथी को चलने-फिरने में परेशानी हो रही थी। स्थानीय लोगों की नजर पड़ने के बाद मामले की जानकारी वन विभाग तक पहुंची।

कैसे फंसा टायर, स्पष्ट नहीं

हाथी के गले में टायर किस तरह फंसा, इसकी अभी स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। प्रारंभिक तौर पर माना जा रहा है कि टायर जंगल या उसके आसपास पड़ा था और हाथी ने उसे सूंड से उठाया होगा। इसी दौरान टायर उसके सिर से होते हुए गर्दन में फंस गया होगा।

वन विभाग की टीम ने संभाला मोर्चा

घटना की जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर हाथी की गतिविधियों पर नजर रखी। रेस्क्यू के दौरान इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि हाथी घबराए नहीं और टीम के सदस्यों को भी कोई खतरा न हो।

सफल रहा रेस्क्यू ऑपरेशन

काफी सावधानी के बाद रेस्क्यू टीम ने हाथी के गले में फंसे टायर को निकालने में सफलता हासिल की। टायर निकलने के बाद हाथी को राहत मिली। वन विभाग की टीम ने रेस्क्यू के बाद उसकी स्थिति पर भी नजर रखी।

वन्यजीवों के लिए गंभीर खतरे की ओर इशारा

यह घटना जंगल और उसके आसपास खुले में फेंके जाने वाले कचरे से वन्यजीवों को होने वाले खतरे को भी सामने लाती है। पुराने टायर, प्लास्टिक और अन्य सामान जंगली जानवरों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।

कचरा निस्तारण को लेकर बढ़ी चिंता

वन्यजीव विशेषज्ञों के मुताबिक, जंगलों और वन्यजीवों के आवास वाले इलाकों में गैर-जरूरी सामान छोड़ना गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। असम की यह घटना भी इसी खतरे की एक तस्वीर पेश करती है।

राहत की बात, हाथी के गले में फंसा टायर निकला

हाथी के गले से टायर सफलतापूर्वक निकाले जाने के बाद फिलहाल सबसे बड़ी राहत यही है कि रेस्क्यू टीम समय रहते उसके पास पहुंच गई। घटना ने वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ जंगलों में कचरा प्रबंधन की जरूरत पर भी सवाल खड़े किए हैं।

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