कोर्ट में ड्रेस कोड में जाएंगे अफसर, यूपी सरकार ने जारी किए सख्त निर्देश

लखनऊ : उत्तर प्रदेश सरकार ने अदालतों में पेश होने वाले अधिकारियों के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को न्यायालय में उपस्थित होने के दौरान निर्धारित ड्रेस कोड का पालन करना होगा। यह व्यवस्था व्यक्तिगत उपस्थिति के साथ-साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होने वाली पेशियों पर भी लागू होगी। हाल ही में न्यायालय के समक्ष पेशी और हलफनामों से जुड़े मामलों में सामने आई अनियमितताओं के बाद शासन स्तर पर यह निर्णय लिया गया है।

हाईकोर्ट की आपत्तियों के बाद लिया गया फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट में कई मामलों की सुनवाई के दौरान अधिकारियों की प्रस्तुति और दस्तावेजों को लेकर सवाल उठे थे। इसके बाद शासन को भेजी गई रिपोर्ट में न्यायालय की गरिमा के अनुरूप आचरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई गई। इसी क्रम में नियुक्ति एवं कार्मिक विभाग ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश जारी किए हैं।

भड़कीले पहनावे पर रहेगा प्रतिबंध

नए निर्देशों के तहत अदालत में पेश होने वाले अधिकारियों को औपचारिक और मर्यादित वेशभूषा में उपस्थित होना होगा। अनौपचारिक, भड़कीले या न्यायालय की गरिमा के विपरीत माने जाने वाले पहनावे से बचने को कहा गया है। अधिकारियों की पहचान संबंधी दस्तावेजों और तस्वीरों में भी निर्धारित मानकों का पालन करना होगा।

वर्चुअल सुनवाई में भी लागू होंगे नियम

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से होने वाली सुनवाई में भी अधिकारी निर्धारित ड्रेस कोड का पालन करेंगे। कोविड काल के बाद बढ़ी वर्चुअल सुनवाई व्यवस्था को देखते हुए यह निर्देश विशेष रूप से जारी किया गया है ताकि ऑनलाइन पेशी के दौरान भी न्यायालय की गरिमा बनी रहे।

हलफनामों और दस्तावेजों के लिए भी मानक तय

शासन ने हलफनामों और न्यायालय में दाखिल किए जाने वाले दस्तावेजों को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अधिकारियों को निर्धारित प्रारूप और औपचारिक प्रक्रियाओं का पालन करने को कहा गया है, जिससे न्यायिक कार्यवाही में अनावश्यक आपत्तियों और देरी से बचा जा सके।

अनुशासन और जवाबदेही पर जोर

सरकार का मानना है कि नए निर्देशों से अदालतों में अधिकारियों की पेशी अधिक व्यवस्थित होगी। साथ ही न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गंभीरता और जवाबदेही भी सुनिश्चित होगी। शासन ने सभी विभागाध्यक्षों, मंडलायुक्तों, जिलाधिकारियों और पुलिस अधिकारियों को निर्देशों का कड़ाई से पालन कराने को कहा है।

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