नई दिल्ली : देश में कुपोषण के खिलाफ जन-जागरूकता और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने के उद्देश्य से 9वां राष्ट्रीय पोषण माह 2026 आज से शुरू हो रहा है। इस वर्ष राष्ट्रीय पोषण माह का केंद्रीय विषय ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ रखा गया है। अभियान का राष्ट्रीय शुभारंभ उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कोऑपरेशन एंड कन्वेंशन सेंटर में किया जा रहा है। इस साल अभियान के केंद्र में आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण, स्वास्थ्य और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनाना है। सरकार का जोर इस बात पर है कि आंगनवाड़ी केवल सरकारी सेवा देने वाला केंद्र न रहे, बल्कि स्थानीय समुदाय उसकी गतिविधियों और व्यवस्था में सक्रिय भागीदारी निभाए।
कब से मनाया जाता है राष्ट्रीय पोषण माह?
राष्ट्रीय पोषण माह की शुरुआत 2018 में पोषण अभियान (POSHAN Abhiyaan) के तहत हुई थी। इसके बाद हर वर्ष सितंबर में देशभर में पोषण से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम और सामुदायिक गतिविधियां आयोजित की जाती हैं। 2026 का अभियान इसका 9वां संस्करण है। पिछले वर्षों में पोषण माह के जरिए मातृ एवं शिशु पोषण, एनीमिया की रोकथाम, बच्चों की वृद्धि की निगरानी, संतुलित आहार, स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली जैसे मुद्दों पर लोगों को जागरूक किया गया है।
क्यों मनाया जाता है पोषण माह?
राष्ट्रीय पोषण माह का मुख्य उद्देश्य पोषण को केवल सरकारी योजना का विषय न रखकर जन आंदोलन बनाना है। इसके जरिए परिवारों और समुदायों को यह समझाने की कोशिश की जाती है कि स्वस्थ बच्चे, स्वस्थ मां और स्वस्थ परिवार के लिए सही पोषण बेहद जरूरी है। अभियान के दौरान विशेष रूप से गर्भवती महिलाएं, स्तनपान कराने वाली माताएं, बच्चे, किशोर-किशोरियां और उनके परिवार फोकस में रहते हैं। सही खान-पान, शिशु एवं छोटे बच्चों के आहार, विकास की निगरानी और स्वच्छता जैसे व्यवहारों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाता है।
इस साल ‘हमारी आंगनवाड़ी, हमारी जिम्मेदारी’ क्यों?
2026 के अभियान में पहली बार सामुदायिक स्वामित्व और जवाबदेही को प्रमुखता दी जा रही है। सरकार का संदेश है कि आंगनवाड़ी केंद्रों की बेहतर व्यवस्था और सेवाओं की जिम्मेदारी केवल विभाग या आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं की नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की साझा जिम्मेदारी होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से सभी आंगनवाड़ी केंद्रों पर आंगनवाड़ी प्रबंधन समितियों (Anganwadi Management Committees) के गठन और उन्हें प्रभावी ढंग से संचालित करने पर जोर दिया जा रहा है।
आंगनवाड़ी केंद्रों पर क्या होगा?
पोषण माह के दौरान देशभर के आंगनवाड़ी केंद्रों पर अलग-अलग जागरूकता और सामुदायिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें बच्चों के पोषण और विकास, मातृ पोषण, संतुलित भोजन, स्वच्छता तथा स्वस्थ आदतों को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर रहेगा। सरकार आंगनवाड़ी केंद्रों को पोषण और प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास के केंद्र के रूप में और मजबूत करने पर काम कर रही है। गर्भवती महिलाओं और माताओं के पोषण पर भी फोकसराष्ट्रीय पोषण माह में मातृ पोषण को महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। 2026 के अभियान में गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए संतुलित और प्रोटीन युक्त आहार के महत्व को लेकर जागरूकता बढ़ाने की योजना है। मां का बेहतर पोषण बच्चे के स्वास्थ्य और विकास से सीधे जुड़ा है। इसलिए परिवारों को गर्भावस्था से लेकर बच्चे के शुरुआती वर्षों तक पोषण और देखभाल के सही तरीकों के बारे में जानकारी देने पर जोर रहेगा।
बच्चों के शुरुआती वर्षों पर विशेष ध्यान
पोषण अभियान में बच्चे के जीवन के शुरुआती वर्षों को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी क्रम में 2026 के पोषण पखवाड़े में भी पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास और पहले 1,000 दिनों के महत्व पर जोर दिया गया था। शुरुआती उम्र में सही पोषण, संवेदनशील देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा बच्चे के शारीरिक, मानसिक और समग्र विकास की मजबूत नींव तैयार करते हैं।
पोषण माह और मिशन पोषण 2.0
राष्ट्रीय पोषण माह मिशन पोषण 2.0 के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। इसका उद्देश्य पोषण सेवाओं को मजबूत करना, कुपोषण से जुड़ी चुनौतियों पर काम करना और समुदाय की भागीदारी बढ़ाना है। इस अभियान में केवल भोजन उपलब्ध कराने के बजाय पोषण संबंधी सही व्यवहार और जागरूकता को भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि पोषण माह के दौरान घर-घर और समुदाय स्तर पर जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाती हैं।
प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के 10 साल
राष्ट्रीय पोषण माह 2026 में प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) के 10 वर्ष पूरे होने को भी रेखांकित किया जाएगा। यह योजना मातृ स्वास्थ्य और पोषण से जुड़े व्यवहारों को समर्थन देने वाली प्रमुख योजनाओं में शामिल है।
लक्ष्य क्या है?
राष्ट्रीय पोषण माह का अंतिम लक्ष्य एक ऐसा भारत तैयार करना है जहां बच्चों और माताओं को पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण पोषण मिले, कुपोषण की समस्या कम हो और परिवार पोषण एवं स्वास्थ्य को लेकर जागरूक हों। 2026 का अभियान इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए ‘सुपोषित भारत’ को ‘विकसित भारत 2047’ की नींव से जोड़ रहा है। सरकार का जोर है कि पोषण की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि परिवार, समुदाय और समाज की साझा जिम्मेदारी बने।
